महेत्तर भोय कान का बहरा’ बनकर सरकारी सिस्टम को लगा रहा है चूना, डॉक्टर से सेटिंग कर 15 साल से डकार रहा लाखों का वेतन!’
कान का बहरा’ बनकर सरकारी सिस्टम को लगाया चूना, डॉक्टर से सेटिंग कर 15 साल से डकार रहा लाखों का वेतन!
महा-फर्जीवाड़ा! / रिकॉर्ड से गायब, पर नौकरी चालू! / छत्तीसगढ़ दस्तक टाइम्स का बड़ा प्रहार!]
आज हम शिक्षा विभाग के एक ऐसे ‘शातिर बहरूपिये’ का पर्दाफाश करने जा रहे हैं, जिसने सरकारी नौकरी की मलाई चाटने के लिए खुद को कागजों पर 45% बहरा साबित कर दिया! जी हां, शासकीय प्राथमिक शाला फर्शवानी में पदस्थ सहायक शिक्षक महेत्तर भोय पर लगा है जालसाजी का ऐसा सनसनीखेज आरोप, जिसे सुनकर आपका खून खौल उठेगा।
मेडिकल रिकॉर्ड में कुछ नहीं, सिर्फ फोटो में ‘विकलांगता’!
साल 2011 में जब छतीसगढ़ प्रदेश के हजारों पढ़े-लिखे और असली दिव्यांग युवा रोजगार के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे थे, ठीक उसी समय महेत्तर भोय ने डॉक्टरों से एक तगड़ी सेटिंग बैठाई। कान से 45% बहरे होने का एक ऐसा जादुई प्रमाण पत्र तैयार करवाया गया, जिसका सच जानकर आप दंग रह जाएंगे। सूत्रों से मिला सबसे बड़ा खुलासा यह है कि इस तथाकथित विकलांगता का वजूद सिर्फ और सिर्फ उस सर्टिफिकेट की फोटो तक सीमित है; सरकारी अस्पताल के मुख्य मेडिकल रिकॉर्ड में इस प्रमाण पत्र की कोई एंट्री ही नहीं है!
• डॉक्टर से सांठगांठ: कान से 45% मूक-बधिर (बहरा) बनने का रचा गया शातिर खेल।
• सर्टिफिकेट असली या मायाजाल?: हाथ में सर्टिफिकेट की फोटो तो है, लेकिन मुख्य सरकारी रिकॉर्ड पूरी तरह खाली!
• 15 साल से मलाई: साल 2011 से लेकर आज तक, शासन की आंखों में सरेआम धूल झोंककर डकार रहे हैं जनता की गाढ़ी कमाई का वेतन।
• असली हकदारों का खून: एक फर्जी बैसाखी के सहारे असली दिव्यांगों का हक मारकर फर्शवानी स्कूल में जमाए बैठे हैं पैर।
और फर्शवानी स्कूल के शासकीय प्राथमिक शाला फर्शवानी में बच्चों को ईमानदारी का पाठ पढ़ाने वाले सहायक शिक्षक महेत्तर भोय खुद जालसाजी के गंभीर आरोपों से घिरे हैं। एक या दो साल नहीं, बल्कि पिछले 15 सालों से यह खेल धड़ल्ले से चल रहा है। डॉक्टरों की मिलीभगत से बना यह ‘कागजी बहरापन’ आज जांच के घेरे में है। सवाल यह उठता है कि जब स्वास्थ्य विभाग के मुख्य रिकॉर्ड में इस प्रमाण पत्र का कोई नामोनिशान नहीं है, तो आखिर किसकी शह पर यह फर्जीवाड़ा इतने सालों तक छुपा रहा?
स्क्रीन पर बड़ा सवाल
“छत्तीसगढ़ दस्तक टाइम्स पूछता है सवाल… क्या विभाग इस ‘कागजी बहरेपन’ पर अब भी मौन रहेगा? रिकॉर्ड में जब कुछ नहीं है, तो इस शिक्षक का तत्काल प्रभाव से री-मेडिकल टेस्ट क्यों नहीं कराया जा रहा?”
यह सीधे-सीधे शासन के साथ गद्दारी और धोखाधड़ी का आपराधिक मामला है। ‘छत्तीसगढ़ दस्तक टाइम्स’ इस फर्जीवाड़े के खिलाफ तब तक आवाज उठाता रहेगा जब तक न्याय न हो जाए। हमारी मांग है कि उच्च अधिकारी इस मामले को संज्ञान में लें, तत्काल प्रभाव से शिक्षक का री-मेडिकल टेस्ट कराया जाए और दोषी पाए जाने पर न सिर्फ बर्खास्तगी हो, बल्कि 15 सालों के वेतन की एक-एक पाई की रिकवरी कर इसे जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाए!
इस बड़ी खबर की हर एक परत को हम उधेड़ते रहेंगे। देखते रहिए छत्तीसगढ़ दस्तक टाइम्स, बुलंद आवाज, निष्पक्ष जांच।


