सारंगढ़ महाघोटाला: राष्ट्रीय राजमार्ग की प्रतिबंधित जमीन की फर्जी रजिस्ट्री का पर्दाफाश!
छत्तीसगढ़ दस्तक टाइम्स न्यूज़ की इस विशेष खोजी रिपोर्ट में आपका स्वागत है। सारंगढ़-रायपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) मार्ग पर स्थित ग्राम मानिकपुर (पटवारी हल्का नंबर 49) में सरकारी नियमोंकी धज्जिया और मज़ाक उड़ाने वाला एक ऐसा अनोखा भू-घोटाला सामने आया है, जिसे सुनकर आप भी दंग रह जाएंगे। राष्ट्रीय राजमार्ग के प्रतिबंधित 100 मीटर के दायरे में आने वाली खसरा नंबर 84/2 की निजी भूमि की रजिस्ट्री, पटवारी, रजिस्ट्रार और तहसीलदार की कथित मिलीभगत और भारी लेन-देन के जरिए करा ली गई है।
इस पूरे घोटाले की सबसे दिलचस्प और शातिर कड़ी यह है कि इस प्रतिबंधित जमीन को कागजों में “पवन” के नाम से साठगांठ कर दर्ज कराया गया है। लेकिन जब हमारी टीम ने इसकी गहराई से पड़ताल की, तो 84/2के निचे यानि पीछे का खेत खरीदार के पवन के नाम पर है आड़ में छिपा एक बेहद चालाकी भरा व्यावसायिक खेल उजागर हुआ। , रास्ट्रीय राजमार्ग की प्रतिबंधित जमीन का रजिस्ट्री का असली खेल
पहली नजर में यह मामला किसी किसान की खेती या सामान्य बिक्री की जमीन जैसा प्रतीत होता है, लेकिन परदे के पीछे की हकीकत पूरी तरह फिल्मी और शातिर दिमाग की उपज है:
नामों का अनोखा घालमेल: जमीन खरीदने वाले बेटे का नाम ‘पवन’ है और उसके पिता (बाप) का नाम ‘बजरंग’ है।
शातिर दिमाग की चाल: नियमों के मुताबिक हाईवे की 100 मीटर की फ्रंट लाइन पर रजिस्ट्री प्रतिबंधित थी। पकड़े जाने के डर से और प्रशासन की आंखों में धूल झोंकने के लिए खरीदार के लिए पटवारी मैडम और रजिस्टॉर चौहान और तहसीलदार ने बड़ी चालाकी और होसियारी से पार्टी बंधित जमीन को बिना भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (National Highways Authority of India) के अनुमति के जमीन को रजिस्ट्री नामांतरण करा दिया गया
मास्टरप्लान: पीछे के खेतों को ‘करोड़पति’ बनाने का मंसूबा
खरीदार पवन (पिता: बजरंग) ने यह पूरी तिकड़म एक बड़े आर्थिक मुनाफे के लिए रची है:
पीछे स्थित है खुद का खेत: इस फ्रंट पैच (सामने की प्रतिबंधित जमीन खसरा नंबर 84/2) के ठीक पीछे खरीदार पवन के खुद का परिवार के सदस्य के नाम का कृषि खेत स्थित है।
हाईवे टच कमर्शियल हब बनाने की तैयारी: पीछे के खेतों का राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) से सीधा रास्ता नहीं था। सामने की इस प्रतिबंधित जमीन को हथियाने का असली मकसद अपने पीछे वाले खेतों को हाईवे से जोड़ना है, ताकि वहां रास्ता बनाकर करोड़ों रुपये का व्यावसायिक साम्राज्य (जैसे होटल, ढाबा या प्लॉटिंग प्रोजेक्ट) खड़ा किया जा सके।
कौन-कौन है इस ‘रिश्वतखोर सिंडिकेट’ में संलिप्त?
बिना राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत और ‘मलाईदार साठगांठ’ के इस प्रतिबंधित भूमि की रजिस्ट्री मुमकिन ही नहीं थी:
मुख्य खरीदार पवन (पिता: बजरंग): जिसने अपने खेतों की कीमत चमकाने के लिए इस पूरी फर्जी स्क्रिप्ट को लिखा और धनबल का इस्तेमाल किया।
हल्का पटवारी (हल्का नंबर 49, मानिकपुर): जिसने मोटी रकम लेकर प्रतिबंधित दायरे की इस जमीन की वास्तविक स्थिति को छुपाया और फर्जीवाड़ा करने में मदद की।
पंजीयक (रजिस्ट्रार कार्यालय): जिसने सिस्टम में ब्लॉक होने योग्य प्रतिबंधित निजी भूमि की रजिस्ट्री बिना किसी आपत्ति के धड़ल्ले से पास कर दी।
तहसीलदार व राजस्व अमला: जिन्होंने अपनी नाक के नीचे हो रहे इस नाम के घालमेल और नियम विरुद्ध सौदे पर मौन रहकर अपनी जेबें गरम कीं।
️ कलेक्टर महोदया की कार्रवाई पर टिकीं नजरें
छत्तीसगढ़ दस्तक टाइम्स में भ्रष्टाचार की यह पोल खुलने के बाद अब समूचे जिले की नजरें कलेक्टर महोदया के ऊपर टिकी हैं। चूंकि यह मामला सिर्फ नियम विरुद्ध रजिस्ट्री का नहीं, बल्कि शासकीय अधिकारियों को गुमराह करने और सोची-समझी जालसाजी (IPC 420/धोखाधड़ी) का है, इसलिए जनता अब निम्नलिखित प्रशासनिक कदमों की मांग कर रही है:
क्या नियमों की धज्जियां उड़ाक के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले खरीदार पवन और पिता बजरंग के खिलाफ एवं संलिप्त अधिकारी कर्मचारियों के ऊपर तत्काल कार्यवाही किया जायेगा
क्या रिश्वत खाकर इस शातिर खेल को मंजूरी देने वाले पटवारी, रजिस्ट्रार और तहसीलदार को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू होगी?
क्या इस अवैध और जालसाजी से की गई रजिस्ट्री को कोर्ट के माध्यम से तुरंत शून्य (निरस्त) घोषित किया जाएगा? अब देखना यह होगा की सामाचार लगने के बाद शासन प्रशासन का बुलडोजर किनके किनके ऊपर चलता है
आगे का समाचार भाग-2 में: छत्तीसगढ़ दस्तक टाइम्स में

