October 5, 2026

सरकारी मकान पर ‘कब्जा’ या ‘किराए का खेल’?

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सरकारी मकान पर ‘कब्जा’ या ‘किराए का खेल’?

सरकारी तंत्र में लापरवाही और साठगांठ की कहानियां तो आपने बहुत सुनी होंगी, लेकिन आज हम आपको दिखाने जा रहे हैं सालर और रेड़ा क्षेत्र का एक ऐसा मामला, जिसने प्रशासन की नाक के नीचे दो विभागों को आमने-सामने खड़ा कर दिया है।
सालर में ग्राम सेवक और कृषि विभाग के लिए स्वीकृत एक सरकारी मकान पर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी का कब्ज़ा है। लेकिन अब इस कहानी में एक नया और चौंकाने वाला मोड़ आ गया है! सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह सिर्फ एक दबंगई का कब्ज़ा है, या फिर इसके पीछे कृषि विभाग के ही किसी ज़िम्मेदार अधिकारी का ‘किराए का गुप्त खेल’ चल रहा है?”

“मामला सालर का है, जहाँ कृषि विभाग के लिए स्वीकृत सरकारी आवास में रेड़ा उप-स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ RHO (ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक) राधेश्याम साहू शान से रह रहे हैं। दूसरे विभाग के मकान पर इस तरह का कब्ज़ा नियमों की धज्जियां उड़ाने के लिए काफी था। लेकिन स्थानीय सूत्रों और गंभीर शिकायतों के बाद अब असली सस्पेंस इस बात पर गहरा गया है कि क्या स्वास्थ्य विभाग के इस कर्मचारी ने जबरन ताला तोड़ा, या फिर सालर में पदस्थ ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी (RAEA) ने खुद विभागीय संपत्ति को ‘अवैध कमाई’ का जरिया बनाकर इसे किराए पर दे दिया?”
स्क्रीन पर ग्राफिक टेक्स्ट (Visual Anchors):
• बड़ा सवाल: कब्ज़ा राधेश्याम का या मिलीभगत कृषि अधिकारी की?
• नियमों की धज्जियां: एक विभाग का मकान, दूसरे विभाग का कर्मचारी!
• किराए का खेल: क्या सरकारी आवास को बना दिया प्राइवेट प्रॉपर्टी?

“जी बिल्कुल, उच्च अधिकारियों तक इस मामले की लिखित शिकायत पहुँचने के बाद अब प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। जांच की सुई अब दोनों तरफ घूम रही है। अगर राधेश्याम साहू ने बिना किसी आवंटन के जबरन कब्ज़ा किया है, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई और बेदखली तय है। लेकिन, अगर जांच में यह सामने आया कि सालर के कृषि विस्तार अधिकारी ने मिलीभगत करके सरकारी मकान को किराए पर दिया था, तो गाज सबसे पहले कृषि विभाग के अधिकारी पर गिरेगी। क्योंकि सरकारी संपत्ति को निजी लाभ के लिए किसी और को सौंपना एक गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अपराध है।”
“अब देखना यह होगा कि इस उच्च स्तरीय शिकायत के बाद शासन और प्रशासन का हंटर किसके ऊपर चलता है?
क्या गाज स्वास्थ्य विभाग के RHO राधेश्याम साहू पर गिरेगी, जिन्होंने अपने पद का रसूख दिखाकर कृषि विभाग के मकान को अपना आशियाना बना रखा है? या फिर इसकी ज़द में आएंगे सालर के कृषि विस्तार अधिकारी, जिनकी नाक के नीचे—या शायद जिनकी रज़ामंदी से—यह पूरा खेल महीनों से चल रहा था?
छत्तीसगढ़ दस्तक टाइम्स न्यूज़ और जनता की नज़र इस जांच पर बनी हुई है। दोषियों पर गाज गिरना तय है, बस देखना यह है कि प्रशासन का बुलडोज़र पहले किसकी लापरवाही पर चलता है।”
“इस मामले की पल-पल की अपडेट और जांच रिपोर्ट हम आप तक पहुँचाते रहेंगे। देखते रहिए छत्तीसगढ़ दस्तक टाइम्स न्यूज़ निष्पक्ष आवाज़।” आगे का समचार भाग 2मे बहुत जल्द…….????