March 2, 2026

प्रदेश के कुख्यात महाठग शिवा साहू का दुस्साहस
जमानत पर बाहर आते ही कानून को खुली चुनौती
फर्जी थाना सील–लेटरपैड से बैंक खातों से निकाले लाखों, पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल

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प्रदेश के कुख्यात महाठग शिवा साहू का दुस्साहस
जमानत पर बाहर आते ही कानून को खुली चुनौती
फर्जी थाना सील–लेटरपैड से बैंक खातों से निकाले लाखों, पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल

1. महाठग को नही है कानून का डर
2. शिवा की तथाकथित गर्लफ्रैंड व पिता सहित एक साथी गिरफ्तार
3. जमानत में रिहा था महाठग
4. ठगी के मास्टरमाइंड शिवा की तलाश में पुलिस
5. जमानत पर रिहा होते ही रिस्तेदारों और साथियों के नाम पर महाठग ने पुनः लग्जरी घर औऱ गाड़ी खरीदी ।
6. लोगों को ठग एवं साथियों के जमानत खारिज होने की आशंका ।
7. महाठग एक बार फिर सुर्खियों में ।
8. आखिर पर्दे के पीछे और कौन कौन है साथ?
9. क्या इस सुनियोजित षड्यंत्र के पीछे कोई और है मास्टरमाइंड?


सारंगढ |
रायकोना निवासी और प्रदेश भर में शेयर मार्केट के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाला कुख्यात महाठग शिवा साहू एक बार फिर अपने शातिर कारनामों को लेकर सुर्खियों में है। इस बार मामला केवल ठगी तक सीमित नहीं है, बल्कि थाना स्तर की पहचान—सील और लेटरपैड—को फर्जी तरीके से तैयार कर बैंकिंग सिस्टम को गुमराह करने का है, जिसे कानून व्यवस्था के लिए बेहद गंभीर चुनौती माना जा रहा है।
   ज्ञातव्य हो कि शिवा साहू ने “शेयर मार्केट में पैसे डबल” करने का लालच देकर सरसींवा, सारंगढ़-बिलाईगढ़, बलौदाबाजार, सक्ति,रायगढ़ सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों के हजारों लोगों से करोड़ों रुपये ऐंठे। ठगी की रकम से उसने आलीशान मकान, महंगी गाड़ियां और अन्य संपत्तियाँ खड़ी कर लीं।
पीड़ितों की लगातार शिकायतों के बाद थाना सरसींवा पुलिस ने शिवा साहू को उसके साथियों सहित गिरफ्तार कर जेल भेजा, साथ ही ठगी से अर्जित संपत्तियों, वाहनों को जब्त कर बैंक खातों को होल्ड किया गया।

-उच्च न्यायालय से जमानत, लेकिन अपराध से तौबा नहीं
माननीय उच्च न्यायालय द्वारा कुछ शर्तों के साथ जमानत मिलने के बाद महाठग शिवा साहू व साथी जेल से बाहर  आये । उम्मीद थी कि कानून का भय उसे अपराध से रोकेगा, लेकिन इसके उलट उसने जमानत का दुरुपयोग करते हुए और भी खतरनाक रास्ता चुन लिया।

-फर्जी थाना दस्तावेज: सुनियोजित षड्यंत्र
थाना सरसींवा से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार,महाठग शिवा साहू ने—
थाना सरसींवा के नाम से फर्जी लेटरपैड तैयार कराया नकली दस्तावेज व थाना के नाम पर आवेदन ,लेटरपेड व सील को जमानत से जुड़े दस्तावेजों के साथ संलग्न किया बैंक को यह दर्शाया कि होल्ड अकाउंट खोलने की अनुमति पुलिस द्वारा दी गई है और बैंक से अपने साथी व तथाकथित गर्लफ्रैंड व उसके पिता के नाम से लाखों रुपये निकाल लिया । यह पूरा कृत्य न केवल जालसाजी है, बल्कि सरकारी दस्तावेजों की कूटरचना और न्यायिक प्रक्रिया से धोखाधड़ी का गंभीर मामला है। इससे ही जाना जा सकता है कि यह महाठग कितना शातिर है जिसके हौसले इतने बुलंद है कि इसे कानून का भय भी नही ।

-बैंक से 31 लाख की सुनियोजित निकासी
फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शिवा साहू ने स्वयं बैंक पहुंचकर अपने भरोसेमंद लोगों के नाम से रकम निकाली—
डिगम जोल्हे के नाम पर – ₹10,00,000
ऋतु साहू (तथाकथित गर्लफ्रेंड) एवं
उसके पिता चन्द्रहास साहू के नाम पर – ₹21,00,000
कुल मिलाकर ₹31 लाख रुपये की निकासी एचडीएफसी बैंक से कराई गई। यह निकासी पूरी तरह पूर्व नियोजित और सुनियोजित ठगी का हिस्सा थी।

– पुलिस की त्वरित कार्रवाई: तीन आरोपी जेल भेजे गए
जैसे ही यह फर्जीवाड़ा उजागर हुआ, थाना सरसींवा पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए—
अपराध क्रमांक:
389/25
390/25
आरोपी:
डिगम जोल्हे, पिता – गुड्डू जोल्हे, निवासी रायकोना
ऋतु साहू, पिता – चन्द्रहास साहू, निवासी टाटा
चन्द्रहास साहू, पिता – दशरथ साहू, निवासी टाटा
धाराएं:
3(5), 318(2), 336(3), 336(4), 338, 340(2), 341(1), 341(2) बीएनएस
के तहत प्रकरण दर्ज कर तीनों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। वही अब महाठग शिवा साहू की तलाश में जुटी हुई है पुलिस ।

-मास्टरमाइंड शिवा साहू फरार
हालांकि इस पूरे षड्यंत्र का मुख्य सूत्रधार शिवा साहू अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। पुलिस उसकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है और जल्द गिरफ्तारी का दावा कर रही है।

– जमानत पर छूटते ही फिर खरीदी संपत्तियाँ
सूत्रों के अनुसार, जेल से बाहर आते ही शिवा साहू ने साथियों के नाम पर लग्जरी मकान
रिश्तेदारों के नाम पर कार और ट्रैक्टर खरीदा ।
जहाँ ठग ने ठगी की रकम को फिर से ठिकाने लगाने की कोशिश की, जो यह दर्शाता है कि उसकी अपराध से कमाई ही जीवनशैली का आधार बन चुकी है।

-ठगी के शिकार हुए आम जनता में आक्रोश, जमानत खारिज होने की संभावना
इस नए खुलासे के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश है। ठगी के शिकार लोग एक बार फिर न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं। जानकारों का मानना है कि—
फर्जी सरकारी दस्तावेज और जमानत का दुरुपयोग सामने आने के बाद शिवा साहू एवं उसके सहयोगियों की जमानत रद्द होने की आशंका जताई जा रही है ।

-बड़ा सवाल
क्या जमानत पर रिहा अपराधियों की निगरानी पर्याप्त है?
बैंकिंग सिस्टम में फर्जी दस्तावेज कैसे स्वीकार हो गए?
आखिर इस षड्यंत्र पूर्वक जालसाजी के पीछे महाठग शिवा के साथ और कौन है शामिल?
इस सोंची समझी साजिश में महाठग का किसने दिया साथ? पर्दे के पीछे आखिर कौन कौन दे रहे ठग को संरक्षण ? क्या इस पूरे सुनियोजित षड्यंत्र के पीछे कोई और है मास्टरमाइंड?
क्या ऐसे मामलों में और सख्त कानून की आवश्यकता है?

रायकोना का महाठग शिवा साहू अब केवल ठगी का आरोपी नहीं, बल्कि कानून, प्रशासन और न्यायिक व्यवस्था को चुनौती देने वाला अपराधी बन चुका है। यह मामला न केवल एक अपराध की कहानी है, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी भी है।

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