बिलाईगढ़ में स्वच्छ भारत मिशन के नाम पर बड़ा खेल: 573 शौचालयों की राशि जारी, ज़मीन पर निर्माण ‘शून्य’ लेकिन समन्वयक के खाते में पहुँचे लाखों रुपये!
बिलाईगढ़ में स्वच्छ भारत मिशन के नाम पर बड़ा खेल: 573 शौचालयों की राशि जारी, ज़मीन पर निर्माण ‘शून्य’ लेकिन समन्वयक के खाते में पहुँचे लाखों रुपये!
बिलाईगढ़। स्वच्छ भारत मिशन (SBM) ग्रामीण के अंतर्गत बिलाईगढ़ क्षेत्र में एक बड़े वित्तीय खेल और भ्रष्टाचार का सनसनीखेज मामला सामने आया है। ज़मीनी स्तर पर बिना किसी वास्तविक शौचालय निर्माण के ही कागज़ों पर 573 शौचालयों की प्रोत्साहन राशि जारी करा दी गई। इस राशि के जारी होते ही भ्रष्टाचार का कमीशन सीधे डिजिटल माध्यम से उच्च पद पर बैठे ज़िम्मेदार के खाते में ट्रांसफर कर दिया गया।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी और डिजिटल लेनदेन के साक्ष्यों (स्क्रीनशॉट्स) के अनुसार, यह कथित लेनदेन रोजगार सहायक, सचिव और अध्यक्ष के माध्यम से जिला शौचालय शाखा के समन्वयक निमिष कुमार साव के व्यक्तिगत बैंक खाते में पहुँचा है।
मात्र 4 दिनों के भीतर ₹1.39 लाख से अधिक का डिजिटल ट्रांसफर
सामने आए डिजिटल पेमेंट के साक्ष्यों ने इस पूरे खेल की पोल खोल कर रख दी है। जिला समन्वयक के पेटीएम यूपीआई आईडी (7999034953@ptsbi) पर मात्र चार दिनों के भीतर अलग-अलग किस्तों में कुल ₹1,39,300.00 ट्रांसफर किए गए हैं। लेनदेन का सिलसिलेवार विवरण इस प्रकार है:
• पहली किस्त (4 जुलाई 2026): शाम 7:28 बजे सीधे समन्वयक के खाते में ₹39,000.00 भेजे गए।
• दूसरी किस्त (6 जुलाई 2026): इसके ठीक दो दिन बाद शाम 7:38 बजे सबसे बड़ी रकम ₹95,000.00 ट्रांसफर की गई।
• तीसरी किस्त (8 जुलाई 2026): इसके बाद सुबह 6:47 बजे ₹5,300.00 की आखिरी किस्त भेजी गई।
कागज़ों पर चमचमाते शौचालय, ज़मीन पर सिर्फ सन्नाटा
शिकायतकर्ताओं और स्थानीय सूत्रों का दावा है कि बिलाईगढ़ क्षेत्र में जिन 573 शौचालयों के नाम पर शासन की लाखों रुपये की राशि स्वीकृत और आहरित की गई है, उनका ज़मीनी स्तर पर कोई अस्तित्व ही नहीं है। बिना भौतिक सत्यापन (Physical Verification) और बिना वास्तविक निर्माण के, सिर्फ कागज़ी हेरफेर और फर्जी जियो-टैगिंग के भरोसे इस पूरी राशि को ठिकाने लगा दिया गया।
इस राशि को जारी कराने के एवज में ही रोजगार सहायक, सचिव और अध्यक्ष स्तर से समन्वयक तक यह “कमीशन का खेल” खेला गया, जिसके पुख्ता प्रमाण अब सार्वजनिक हो चुके हैं।
उच्च स्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग
सरकारी योजनाओं में इस तरह खुलेआम डिजिटल माध्यम से रिश्वत और कमीशनखोरी का खेल चलना प्रशासनिक पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े करता है। स्थानीय ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों ने इन पुख्ता डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जिला कलेक्टर, जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) से मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज कर सेवा से बर्खास्त करने की मांग की है।
