करोड़ों की पानी टंकी बनी दिखावे का खेल प्यासी जनता और अफसर मस्त! धूमाभाठा में पीएचई विभाग और ठेकेदार की खुली पोल






सारंगढ़-बिलाईगढ़ ब्रेकिंग: करोड़ों की पानी टंकी बनी ‘शोपीस’, जनता प्यासी, अफसर मस्त! धूमाभाठा में पीएचई विभाग और ठेकेदार की खुली पोल
सारंगढ़-बिलाईगढ़। सरकार जहां एक तरफ हर घर तक नल से जल पहुंचाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं धरातल पर भ्रष्ट कार्यप्रणाली और लापरवाही इन योजनाओं को पलीता लगा रही है। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम धूमाभाठा से सामने आया है, जहां लाखों-करोड़ों की लागत से बनी पानी की टंकी सिर्फ एक ‘शोपीस’ बनकर रह गई है। निर्माण कार्य पूरा होने के महीनों बाद भी आज तक ग्रामीणों के घरों तक पानी की एक बूंद भी नहीं पहुंची है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
इंजीनियरिंग का अनोखा खेल: बोर से टंकी तक चढ़ ही नहीं रहा पानी
ग्रामीणों ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग और संबंधित ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि टंकी तो खड़ी कर दी गई, लेकिन तकनीकी खामियों के चलते बोर से पानी ऊपर स्थित टंकी तक चढ़ ही नहीं पा रहा है। बिना सोचे-समझे और बिना सही तकनीकी जांच के किए गए इस निर्माण के कारण पूरी जलापूर्ति व्यवस्था ठप पड़ी है। जनता के टैक्स के पैसे से बनाई गई यह व्यवस्था आज खुद अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है।
सुरक्षा ताक पर, बाउंड्रीवॉल का अता-पता नहीं
लापरवाही सिर्फ पानी न चढ़ने तक सीमित नहीं है। पानी टंकी परिसर की सुरक्षा को भी पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है। परिसर के चारों तरफ बाउंड्रीवॉल (सुरक्षा दीवार) का निर्माण तक नहीं कराया गया है। खुले पड़े इस परिसर में कभी भी कोई अप्रिय घटना घट सकती है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी गहरी नींद में सोए हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शासकीय संपत्ति की सुरक्षा और गांव की सुरक्षा के लिए बाउंड्रीवॉल का तुरंत निर्माण होना बेहद जरूरी था, जिसे ठेकेदार और विभाग ने मिलकर दबा दिया।
ग्रामीणों ने खोला मोर्चा, आंदोलन की चेतावनी
इस अंधेरगर्दी के खिलाफ अब ग्राम धूमाभाठा के ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। पूर्व पंच मुरलीधर नायक, वार्ड क्रमांक 4 की पंच पिंकिला मानिकपुरी, धनमति सीदार, नरेंद्र यादव और पिंटू मानिकपुरी समेत भारी संख्या में ग्रामीणों ने विभाग और ठेकेदार के खिलाफ तीखा आक्रोश व्यक्त किया है। ग्रामीणों ने दोटूक शब्दों में मांग की है कि तकनीकी खामियों को तुरंत दूर कर बोर से टंकी तक पानी चढ़ाया जाए, बाउंड्रीवॉल का निर्माण हो और हर घर तक शुद्ध पेयजल की आपूर्ति शुरू की जाए।
अब देखना यह होगा कि इस खबर के बाद कुंभकरणी नींद में सोया पीएचई विभाग जागता है या फिर धूमाभाठा के ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरसते रहेंगे और यह टंकी सिर्फ देखने की वस्तु बनी रहेगी।
